अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुए संघर्ष के बाद तेहरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है और अब ईरान पहले जैसा शक्तिशाली देश नहीं रहा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट करते हुए कहा कि युद्ध ने ईरान की एयरफोर्स, नेवी, एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और लगभग सभी महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। उनके अनुसार, ईरान के पास अब प्रभावी रक्षा व्यवस्था भी नहीं बची है। इसके साथ ही ट्रंप ने अपने राजनीतिक विरोधियों, खासकर डेमोक्रेट्स पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन दावों का मजाक उड़ाया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान पहले से बेहतर स्थिति में हो सकता है। ट्रंप ने ऐसे बयानों को “गलत और मूर्खतापूर्ण” बताया। ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध के बाद बातचीत की पहल अमेरिका ने नहीं बल्कि ईरान ने खुद की थी, क्योंकि वह गंभीर रूप से कमजोर हो चुका है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी दबाव में नहीं है और अपनी मौजूदा नीति पर कायम रहेगा। ट्रंप ने साफ किया कि ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक राहत या “एक पैसा भी” नहीं दिया जाएगा। इसी बीच एक नई कूटनीतिक पहल की भी जानकारी सामने आई है, जिसके तहत अमेरिका और ईरान के बीच 14-सूत्रीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने का दावा किया गया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव और संघर्ष को खत्म करना बताया जा रहा है। समझौते में अगले 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर बातचीत जारी रखने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और समुद्री नाकाबंदी हटाने जैसे कदमों पर भी चर्चा शामिल है।