झारखंड सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य में सड़क हादसे के शिकार मरीजों का **निजी अस्पतालों में 1.50 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज** किया जाएगा। इस सुविधा के लिए मरीज के पास **आयुष्मान भारत कार्ड, हेल्थ इंश्योरेंस या किसी अन्य बीमा दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी।** इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से वहन करेगी और अस्पताल बाद में सरकार से क्लेम कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य दुर्घटना के बाद इलाज में होने वाली देरी को रोकना है। अब निजी अस्पतालों को घायल मरीजों का तुरंत प्राथमिक और आवश्यक उपचार शुरू करना होगा। केवल गंभीर स्थिति में, प्राथमिक उपचार देने के बाद ही मरीज को किसी बड़े अस्पताल या उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जा सकेगा। इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए रांची जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों के प्रबंधकों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मरीज की आर्थिक स्थिति, भुगतान क्षमता या दस्तावेजों की कमी के आधार पर इलाज से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, अस्पतालों को प्रत्येक सड़क दुर्घटना से जुड़े मरीज का पूरा रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसमें मरीज की स्थिति, उपचार की जानकारी, खर्च का विवरण और आवश्यकता पड़ने पर मृतकों का रिकॉर्ड भी दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे पूरी प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का मानना है कि यह पहल सड़क हादसों में घायलों को 'गोल्डन ऑवर' के दौरान समय पर इलाज दिलाने में मदद करेगी, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी।